चार स्मार्ट सिटीज का प्लान फाइनल – नवभारत टाइम्स – 25-Nov-2014

November 25, 2014 - Uncategorized

लैंड पूलिंग के तहत दिल्ली में स्मार्ट सिटी बसाने का प्लान है। सिटी की सबसे बड़ी खासियत होगी मेन रोड, जिसे 300 फुट चौड़ा बनाया जाएगा। इस रोड की पूरी लंबाई के दोनों ओर 500-500 मीटर जगह लेते हुए पूरा कमर्शल हब बनाया जाएगा।

कमर्शल हब में प्राइमरी स्कूल, सेकंडरी स्कूल, कॉलेज, डिस्पेंसरी, हॉस्पिटल, एम्यूजमेंट सेंटर, जिम, नेहरू प्लेस और भीकाजी कामा प्लेस जैसे बिजनेस स्पॉट, पुलिस स्टेशन, फायर ब्रिगेड ऑफिस, कम्यूनिटी सेंटर, ओल्डएज होम और रेस्टोरेंट सहित रोजमर्रा में काम आने वाले दूसरे सेंटर होंगे। मेट्रो और रोड ट्रांसपोर्ट का भी बेहतरीन तालमेल बैठाया जाएगा। रात के वक्त स्ट्रीट लाइट से विजिबिलिटी का खास ख्याल रखा जाएगा, ताकि आपराधिक तत्वों को क्राइम करने से रोका जा सके।

स्मार्ट सिटी ग्रीन कॉन्सेप्ट पर होगी। कोशिश यही रहेगी कि इसकी बिल्डिंगों में बाहर की दीवारें सफेद रंग की हों, ताकि बिजली की कम खपत हो। इस सिटी में पानी के इस्तेमाल का ऐसा इंतजाम होगा जिससे पानी का दोबारा भी यूज हो सके। रेन वॉटर हारवेस्टिंग भी की जाएगी। इस बारे में डीडीए की ओर से बताया गया है कि जल्द ही लैंड पूलिंग पॉलिसी के लिए नॉटिफिकेशन हो जाएगा। लैंड पूलिंग का मतलब एक से अधिक डेवलेपर्स अपनी जमीन को डीडीए को देंगे। बदले में डीडीए उस जमीन के बदले अपने हिसाब से उन डेवलेपर्स को लैंड देगा। जहां रेजिडेंशल और यह कमर्शल कंस्ट्रक्शन किया जा सकेगा।

इसके लिए शर्त यह रखी गई है कि जो जमीन डीडीए को दी जाएगी वह कम से कम 5 एकड़ होनी चाहिए। इसके लिए दो कैटिगरी रखी गई हैं। पहली में पांच एकड़ से लेकर 50 एकड़ तक और दूसरी कैटिगरी में 50 एकड़ से ऊपर कितनी भी हो सकती है। जहां पर प्राइवेट डेवलेपर्स की मदद से स्मार्ट सिटी बनाई जा सकती हैं। डीडीए का कहना है कि डीडीए को दी जाने वाली यह जमीन किसी भी जोन में हो सकती है। मगर बदले में जो जमीन डीडीए डेवलेपर्स को देगा वह अपने हिसाब से देगा। जहां हाउसिंग सोसायटी बनाई जा सकेंगी। डीडीए का मानना है कि इस पॉलिसी से अगले 10 सालों में दिल्ली में 20 लाख फ्लैट बनाए जा सकेंगे।

लैंड पूलिंग

डीडीए के अधिकारियों ने बताया कि लैंड पूलिंग के तहत अगर कोई एक शख्स या कई लोग मिलकर पांच से 50 एकड़ जमीन डीडीए को रेजिडेंशल यूज के लिए देते हैं तो इसमें से डीडीए 48 फीसदी लैंड वापस लैंड मालिकों को फ्लैट बनाने के लिए दे देगा बाकी 52 फीसदी जमीन अपने पास रख लेगा। उस जमीन पर सड़क, पार्क और दूसरी मूलभूत सुविधाएं दी जाएंगी। जबकि 50 एकड़ से अधिक जमीन वाली कैटिगरी में डीडीए 60 फीसदी जमीन डेवलेपर्स को वापस देगा और बाकी में दूसरी जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी।

स्मार्ट सिटी

इस पॉलिसी के तहत नजफगढ़ के पीछे जोन-एल, कंझावला जोन-एन, बख्तावरपुर जोन-पी11 और नांगलोई एरिया जोन के-1 में स्मार्ट सिटी बनाई जाएंगी। दिल्ली में इन चार जगहों पर करीब 24 हेक्टेयर जमीन की पहचान की गई है।

 

नवभारत टाइम्स

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