महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के नाम पर घोटाला – दैनिक जागरण – 4-Dec-2014

December 9, 2014 - Uncategorized

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम घोटालों का निगम बनता जा रहा है। पिलर बॉक्स घोटाला, एबी केबल घोटाला और केबल-स्विच घोटाला के बाद अब महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के नाम पर भारी घोटाले की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि बस्तियों में अधिकांश जगह बिना ट्रांसफार्मर लगाए ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई। इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर ने एनओसी भी जारी कर दी। प्रदेश सरकार ने शिकायत के आधार पर जांच बैठा दी है।

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को सरकार प्लाट उपलब्ध करा रही है। जहां भी योजना के तहत बस्ती विकसित हो रही है, वहां पर तत्काल प्रभाव से बिजली आपूर्ति करना अनिवार्य है। योजना के तहत बिजली निगम के बोहड़ाकलां, बादशाहपुर, फरुखनगर, मानेसर, पटौदी एवं न्यू कालोनी सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में बीपीएल परिवार को प्लाट दिए गए हैं। शिकायत है कि अधिकांश जगह निगम की ओर से ट्रांसफार्मर नहीं लगाए गए, लेकिन रिपोर्ट में लगा हुआ दिखा दिया गया है। यही नहीं इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर ने बिना छानबीन के एनओसी भी जारी कर दिया है। सवाल है कि जब ट्रांसफार्मर लगे ही नहीं, तो फिर इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर ने एनओसी जारी कैसे कर दिए। इससे पहले भी इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टरों के ऊपर कार्यालय में बैठे-बैठे एनओसी जारी करने के आरोप लगते रहते हैं।

छह सहायक महाप्रबंधक को नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के बोहड़ाकला सब डिवीजन, बादशाहपुर सब डिवीजन, फरूखनगर सब डिवीजन, मानेसर सब डिवीजन, पटौदी सब डिवीजन एवं न्यू कालोनी सब डिवीजन के सहायक महाप्रबंधक नोटिस जारी किया गया है। सभी को विजिलेंस के सामने अपना पक्ष रखना है। जांच की जिम्मेदारी बिजली निगमों की विजिलेंस शाखा गुड़गांव के उपनिदेशक, करनाल शाखा के उपनिदेशक एवं फरीदाबाद शाखा के उपनिदेशक को सौंपी गई है। विजिलेंस शाखा गुड़गांव के उपनिदेशक प्रमोद सिंगला ने स्वीकार किया कि किसी ने शिकायत ऊपर की थी। उसके आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी। इधर, सूत्र बताते हैं कि मामला सामने आने के बाद जहां भी ट्रांसफार्मर लगाए जाने थे, वहां पर ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं ताकि जांच में मौके पर सबकुछ ठीकठाक मिले।

मुख्यमंत्री के पास मंत्रालय होने से हड़कंप

मामला सामने के बाद अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। बिजली मंत्रालय मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के पास है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर रखा है कि जिसके बारे में शिकायत पहुंची, तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री बनते ही अपनी पहली बैठक में खट्टर ने स्पष्ट कर दिया था कि भ्रष्टाचार या कार्यो में लापरवाही से संबंधित एक भी शिकायत वह बर्दाश्त नहीं करेंगे।

 

Dainik Jagran

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