बिल्डर के खिलाफ फ्लैट खरीदारों ने किया प्रदर्शन – दैनिक जागरण – 14-Dec-2014

December 24, 2014 - Uncategorized

बिल्डरों के खिलाफ आए दिन विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शनिवार को एक प्रतिष्ठित बिल्डर के खिलाफ लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बिल्डर द्वारा समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिए जाने पर निवेशक और ग्राहक कंपनी के सिग्नेचर टावर स्थित कार्यालय पर एकत्र हुए और उन्होंने अपना विरोध जताया।

दरअसल वर्ष 2009 में बिल्डर ने गुड़गांव के सेक्टर 70 में आवासीय परियोजना की शुरुआत की थी। उस वक्त बिल्डर ने निवेशकों से वायदा किया था कि निर्माण कार्य पूरा करके इस परियोजना का कब्जा वर्ष 2012 में दे दिया जाएगा, लेकिन कंपनी अपना वायदा निभाने में पूरी तरह असफल रही।

परियोजना में फ्लैट 2012 में दिए जाने थे। तय तारीख बीते हुए भी दो साल हो चुके हैं, बावजूद इसके अभी तक यह पता नहीं चल पा रहा कि आखिर ग्राहकों को उनके सपनों का आशियाना कब तक मिल सकेगा। विरोध समिति की प्रधान मोनिका महाजन ने बताया कि परियोजना के तहत 1300 फ्लैट हैं, सभी फ्लैट बिक भी चुके हैं। फ्लैट के कब्जे के संबंध में जब भी बिल्डर से जवाब मांगा जाता है तो वह कुछ समय बाद फ्लैट देने की बात करता है। कुछ समय करते-करते तय तारीख के बाद भी दो साल बीत गए, लेकिन किसी को यहां फ्लैट नहीं मिल सका।

फ्लैट की बुकिंग कराने वाले दीपक ने कहा कि सबसे बड़ी परेशानी की बात यह है कि इस परियोजना में घर खरीदने के लिए लोन लिया था। सोचा था कि जल्दी ही अपने घर में शिफ्ट हो जाएंगे, लेकिन फ्लैट अभी तक नहीं मिला। ऐसे में होम लोन की किस्त के साथ किराया भी देना पड़ रहा है। खर्च की दोहरी मार पड़ रही है। बच्चों की पढ़ाई और दूसरे खर्चो की तो जैसे कंपनी को कोई परवाह ही नहीं है। हमने यहां विरोध-प्रदर्शन में उच्च अधिकारियों से मिलने की मांग की है, लेकिन कंपनी इसके लिए भी तैयार नहीं हो रही।

फ्लैट खरीदार जयदीप ने बताया कि उन्होंने कंपनी में बात की थी कि यदि वह फ्लैट देने में असमर्थ है तो कम से कम हमें हमारा पैसा ही लौटा दे। हम पैसा लेकर कहीं दूसरी जगह घर खरीद लेंगे, लेकिन कंपनी तो इसके लिए भी तैयार नहीं हो रही। प्रदर्शन में शामिल अनिल का कहना था कि गुड़गांव में बिल्डर नई परियोजना की घोषणा करके तीन-साढ़े तीन साल के बाद कब्जा देने की बात करके बुकिंग करा लेता है। बुकिंग के नाम पर बिल्डर लाखों रुपया कमा लेते हैं, लेकिन वक्त पर निर्माण नहीं करते। आखिर में पूरा नुकसान ग्राहकों को उठाना पड़ता है। जरूरी है कि सरकार और प्रशासन इस बारे में कड़े कानून बनाए, जिससे आम आदमी के हितों की रक्षा हो सके।

विरोध-प्रदर्शन के इस संबंध में जब बिल्डर का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो कंपनी की तरफ से कोई बयान नहीं दिया गया।

 

Dainik Jagran

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